
विज्ञान: अफ्रीका के कोट द’ईवोआर के ताई नेशनल पार्क में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, एक बंदर द्वारा गिलहरी को खाने के बाद एमपॉक्स (Mpox) का प्रकोप फैल गया। यह जानकारी 11 फरवरी को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Nature
Sting Newz | 24 x 7 Online News From Bengal –All News In Your Fist
All News In Your Fist

विज्ञान: अफ्रीका के कोट द’ईवोआर के ताई नेशनल पार्क में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, एक बंदर द्वारा गिलहरी को खाने के बाद एमपॉक्स (Mpox) का प्रकोप फैल गया। यह जानकारी 11 फरवरी को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Nature
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 की शुरुआत में ताई नेशनल पार्क में रहने वाले सूटी मैंगाबे (Cercocebus atys) बंदरों के एक समूह में अचानक एमपॉक्स के लक्षण दिखाई देने लगे। इस समूह में कुछ दर्जन बंदर थे, जिनमें से लगभग एक-तिहाई में त्वचा पर घाव जैसे लक्षण विकसित हुए और चार शावकों की मौत हो गई।
जांच में पता चला कि संक्रमण की शुरुआत तब हुई जब समूह के एक बंदर ने फायर-फुटेड रोप स्क्विरल (Funisciurus pyrropus) नामक गिलहरी को खा लिया। शोधकर्ताओं का मानना है कि यही गिलहरी वायरस का स्रोत थी। यह पहली बार है जब जंगली वातावरण में मंकीपॉक्स वायरस को एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में फैलते हुए प्रत्यक्ष रूप से दर्ज किया गया है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि जानवरों से इंसानों में वायरस का फैलाव — जिसे “स्पिलओवर” कहा जाता है — अक्सर मानव एमपॉक्स प्रकोप की जड़ में होता है। इसलिए यह पहचानना बेहद जरूरी है कि किन जानवरों में यह वायरस मौजूद हो सकता है।
नाइजीरिया के नेशनल वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट के पशुचिकित्सक और वायरोलॉजिस्ट क्लेमेंट मेसेको का कहना है कि इस तरह के शोध से रोकथाम के उपाय तय करने में मदद मिल सकती है। उदाहरण के तौर पर, जिन लोगों का संपर्क फायर-फुटेड गिलहरियों से होता है, उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण पहनने और जानवरों को छूने के बाद हाथ अच्छी तरह धोने की सलाह दी जा सकती है।
यह अध्ययन इस बात की चेतावनी भी देता है कि वन्यजीवों के संपर्क में आने पर संक्रमण का खतरा कितना गंभीर हो सकता है, और समय रहते सावधानी बरतना कितना जरूरी है।